Shrishti Mehta

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Hemlata Paliwal

देश प्रेम

देश प्रेम का गर मूल्य प्राण है तो देकर मै चुकाऊँगा। ऊँची-ऊँची सुमनशैया तज कंटक पथ अपनाऊँगा।…. 

वो क्या जाने ,देश का मूल्य, जो वतन से गद्दारी करते है। सरकारी धन-दौलत से वो अपनी तिजौरी भरते हैखून चूसते गरीबो का नित्य अपनी धाक वो जमाते है। 

देश-प्रेम का मूल्य प्राण है... 

वतन पर मिटने वाले फरिश्ते, सर पर कफ़न बाँध घूमते है। पड जाएँ सामना दुश्मन से तो खाक में मिलाकर ही छोडते है। मौत उनकी महबूबा है,और जान हथेली पर वो रखते है। देश प्रेम का मूल्य....… 

केसरियाँ वागा तन पर सजाकर रक्त से भाल पर,टिका लगाते। तन-मन बंसती रंग से रंगकर वो 

 

वंदे मातरम् के गीत गुनगुनाते। 

खून चूते गरीबो का नित्य अपनी धाक वो  जमाते है। 

देश-प्रेम का मूल्य प्राण है... 

वतन पर मिटने वाले फरिश्ते, सर पर कफ़न बाँध घूमते हैड जाएँ सामना दुश्मन से तो खाक में मिलाकर ही छोडते है। मौत उनकी महबूबा है,और जान हथेली पर वो रखते है। देश प्रेम का मूल्य...…. 

केसरियाँ वागा तन पर सजाकर रक्त से भाल पर,टिका लगाते।

 तन-मन बंसती रंग से रंगकर वो वंदे मातरम् के गीत गुनगुनाते

ध्वजा-पताका लहराते चलते मर-मिटने की कसमे खाते देश प्रेम का मूल्य…....

देश के लिए जीना है मरना है 

फिर किसी से क्यो डरना है।

 काल-कूट के विषमय प्याले

कंठ मे हर वक्त धारण करना है। 

अत्याचारो की आँधी को चीरकर मसल मसल डालते है। 

देश प्रेम का मूल्य प्राण हे 

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